Vaishnava Jana To Tene Kahiye

Bhajan Lyrics: Narsinh Mehta

Lata Mangeshkar:

Gujarati:

વૈષ્ણવ જન તો તેને કહિયે
જે પીડ પરાયી જાણે રે
પર દુ:ખે ઉપકાર કરે તો યે
મન અભિમાન ન આણે રે. ॥ધૃ॥

સકળ લોકમાં સહુને વંદે,
નિંદા ન કરે કેની રે
વાચ કાછ મન નિશ્છળ રાખે
ધન ધન જનની તેની રે. ॥૧॥

સમદૃષ્ટિ ને તૃષ્ણા ત્યાગી
પરસ્ત્રી જેને માત રે
જિહ્વા થકી અસત્ય ન બોલે
પરધન નવ ઝાલે હાથ રે. ॥૨॥

મોહ માયા વ્યાપે નહિ જેને,
દૃઢ વૈરાગ્ય જેના મનમાં રે
રામ નામ શુ તાળી રે લાગી
સકળ તીરથ તેના તનમાં રે. ॥૩॥

વણ લોભી ને કપટ રહિત છે,
કામ ક્રોધ નિવાર્યાં રે
ભણે નરસૈયો તેનું દર્શન કરતાં
કુળ એકોતેર તાર્યાં રે. ॥૪॥

Hindi:

वैष्णव जन तो तेने कहिये
जे पीड परायी जाणे रे ।
पर दुःखे उपकार करे तो ये
मन अभिमान न आणे रे ॥

सकळ लोकमां सहुने वंदे,
निंदा न करे केनी रे ।
वाच काछ मन निश्चळ राखे,
धन धन जननी तेनी रे ॥

समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी,
परस्त्री जेने मात रे ।
जिह्वा थकी असत्य न बोले,
परधन नव झाले हाथ रे ॥

मोह माया व्यापे नहि जेने,
दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे ।
रामनाम शुं ताळी रे लागी,
सकळ तीरथ तेना तनमां रे ॥

वणलोभी ने कपटरहित छे,
काम क्रोध निवार्या रे ।
भणे नरसैयॊ तेनुं दरसन करतां,
कुळ एकोतेर तार्या रे ॥

IAST:

vaiṣṇava jana to tene kahiye
je pīḍa parāyī jāṇe re,
para duḥkhe upakāra kare to ye
mana abhimāna na āṇe re

sakaḷa loka māṁ sahune vande,
nindā na kare kenī re,
vāca kācha mana niścala rākhe,
dhana dhana jananī tenī re

sama-dṛṣṭi ne tṛṣṇā tyāgī,
para-strī jene māta re,
jihvā thakī asatya na bole,
para-dhana nava jhāle hātha re

moha māyā vyāpe nahi jene,
dṛḍha-vairāgya jenā manamāṁ re,
rāma-nāma śuṁ tāḷī re lāgī,
sakaḷa tīratha tenā tanamāṁ re

vaṇa-lobhī ne kapaṭa-rahita che,
kāma krodha nivāryā re,
bhaṇe narasaiyo tenuṁ darasana karatāṁ,
kuḷa ekotera tāryā re

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Sanson Ki Mala Pe Simru Main Pe Ka Naam

Film: Koyla (1997):

Ustad Nusrat Fateh Ali Khan:

सांसो की माला पे सिमरूं मैं पि का नाम
अपने मन की मैं जानु और पि के मन की राम

दीन धरम सब छोड़ के मैं तो पि की धुन में खोयी
जित जाऊं गुण पि के गाऊं नाहि दूजा काम

प्रेम पियाला जबसे पिया है जी का है ये हाल
चिंगारों पे नींद आ जाए कांटो पे आराम

प्रीतम तुमरे ही सब है अब अपना राज सुहाग
तुम नाही तो कछु नाही तुम मिले जागे भाग

आ पिया इन नैनन में जो पलक ढांप तोहे लूँ
ना मैं देखूँ गैर को ना तोहे देखन दूँ

ढांप लिया पलकों में तुझको बंद कर लिए नैन
तू मुझको मैं तुझको देखूं गैरों का क्या काम

जीवन का सिंगार है प्रीतम मांग का है सिन्दूर
प्रीतम की नज़रों से गिरके जीना है किस काम

प्रेम के रंग में ऐसी डूबी बन गया एक ही रूप
प्रेम की माला जपते जपते आप बनी मैं श्याम

प्रीतम का कछु दोष नहीं है वो तो है निर्दोष
अपने आप से बातें करके हो गयी मैं बदनाम

वो चातर है कामिनी वो है सुन्दर नार
जिस पगली ने कर लिया साजन का मन राम
नील गगन से भी परे सैंयाजी का गांव
दर्शन जल की कामना पथ रखियो हे राम

अब किस्मत के हाथ है इस बंधन की लाज
मैंने तो मन लिख दिया साँवरिया के नाम
जब से राधा श्याम के नैन हुए हैं चार
श्याम बने हैं राधिका राधा बन गयी श्याम

हाथ छुड़ावत जात हो निर्बल जानके मोहे
हिरदय में से जाओ तब मैं जानु तोहे
काजल डालूँ हो जाए किरकिरी ना रहे बह जाए
जिन नैनन में पि बसे वहाँ दूजा कौन समाए

सांसो की माला पे सिमरूं मैं पि का नाम
प्रेम के पथ पे चलते चलते हो गयी मैं बदनाम
सांसो की माला पे सिमरूं मैं पि का नाम
अपने मन की मैं जानु और पि के मन की राम

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